Sunday, 4 June 2017

ek nayi ada mili hai

एक नयी अदा मिली है
खुद से कुछ चाहत सी होने लगी है
अपने ख्वाबो में
तुम्हे देखने की आदत सी होने लगी है
खुदा ही जाने
क्यू देख के तुम्हे, सजदे में सर मेरा झुक जाता है
धरती का हर कतरा रुक जाता है
जो तुम ना कहते हो
वो तुम्हारी खामोशी कह जाती है
ज़ुबान पे आती नही बात जो
आँखें तुम्हारी बयान कर जाती हैं
कुछ देर, कुछ समय बिता क देखो
काई अनसुने गीत सुनाई देंगे
कुछ देर, पास बैठ क देखो
दिल में छिपी कई ख्वाहिशें दिखाई देंगी
कुछ देर, दुनिया छोड़कर देखो
एक नयी दुनिया दिखाई देगी
बस कुछ देर, सब दर्द भूलकर देखो
खुशियों की काई वजह दिखाई देंगी
बारिश क पानी में
पलकों से मेरी कई कहानियाँ बह जाती हैं
यूँ तो हर हालत में संभालना आता है
पर कहीं ना कहीं,
खुद को ग़लत साबित करने की गुज़ारिश भी इसमे छिपी रह जाती है
अंधेरी इस दुनिया में
रोशिनी का तुम दिया बन जाओ
मतलबी से संसार में
तुम मेरा जहाँ बन जाओ
बस थोड़े से प्यार की ज़रूरत है
थोड़े से सहारे की
खुद को तोड़ा सा खुश रख साकु जिसमे
ज़रूरत है ऐसे नज़ारे की
बस, जितनी बार भी गिरु
हाथ तुम्हारा मौजूद हो
कितनी भी मुश्किल आए
कंधा तुम्हारा हमेशा महसूस हो
छूकर देखोगे, बिखर जौंगी
ढूँढने निकलेगा जो कोई
सिर्फ़ आँखों में तुम्हारी पाई जौंगी
लफ्ज़ ऐसे कहने हैं
की सूरत न्ही, मेरी शायरी से तुम्हे प्यार हो जाए
जब भी मेरी कलाम से स्याही निकले
उन लफ़ज़ो से तुम्हे ऐतबार हो जाए
अब इन काग़ज़ क पन्नो से
इबादत सी हो गयी है
इनकी ख़ूसबु से अब मुझे
मोहब्बत सी हो गयी है
कहते कहते इतना कह जाना है
की अल्फाज़ो को और कष्ट ना देना पड़े
की आँखें बंद करके बाहों में तुम्हारी, एक सुकून की साँस ले लू
की भरोसा करने क लए तुमपर, निगाहें खोलने की ज़रूरत तक ना पड़े.

SACH HAI

सच है, हर वो बात सच है
जो अंजाने में नज़रें मेरी बयान कर गयी
मेरी समझ ना आई कभी
अंजाने ही सही, असर मेरी दुआ कर गयी
कुछ बातें थी पुरानी
दिल में जो मेरे घर कर गयी
घाव गहरे थे काई
बातें कुछ और चोट कर गयी
मगर धड़कने वो सुन ली उसने
जो चुपके से आज़ाद अपने पर कर गयी

MAA

छोटी सी थी जब मैं

किया मैने सबसे एक सवाल

जवाब ना मिलने पर

मचा दिया पुर घर में बवाल.

कहाँ से आई हूँ मैं

क्या मुझे कचरे के डब्बे से लाया गया है??

बहुत गुस्सा हुई मैं

की आख़िर क्यूँ मुझसे सच छुपाया गया है

सबके समझाने के बाद

आई मा की बारी

बड़ी ही नम्रता से कहते हुए

दिखाई उसने बोहोत समझदारी

बोली, की क्यूँ मेरी प्यारी सी परी मुझसे खफा है?

अरे, हम सब क लए तो तू भगवान का तोहफा है!

इसी प्यार से हमेशा मेरी मा ने मुझे बड़ा किया

हमेशा साथ रहते हुए, मुझे अपने पैरो पे खड़ा किया

की आज समझ आता है उनकी हर दाँत का मकसद

उनके द्वारा दी गयी हर सीख थी ज़बरदस्त

की हर काम क लए पापा को परेशान करने वाली लड़की

अब कई परेशानियो से खुद ही है निपात लेती.

मा की दाँत सुनकर अक्सर गुस्सा हो जाती थी

की मेरी तो कोई ग़लती ही नही थी

पर उनको है ज़्यादा अनुभव मुझसे

ये बात मैं समझ पति नही थी.

आज, दूर हूँ तुझसे तो ये सारी बातें समझ आती हैं

मा, मुझे तेरी बोहोत याद आती है.

की ढेर सारा काम करके तेरी गोद में सोने का मन करता है

तेरे बिना यहाँ सब कुछ बोहोत सूना सा लगता है.

की जब कोई दिक्कत होती है,

तो तेरा कंधा याद आता है

मा, मुझे तेरा साथ बोहोत भाता है.

की अब मेरे नखरे झेलने वाला कोई नही है

मुझे पता है मा, मेरी याद में तू कई रातें सोई नही है

की जीती आई हूँ तेरे ढेर सारे प्यार में

की आपसे सुंदर कोई इंसान नही इस संसार में.

मुझे मेरी हर ग़लती क लए माफ़ क्रना

सदा क लए ऐसे ही मेरे साथ रहना

आगे भी काई ग़लतियाँ होने वाली हैं

अभी तो आपको है मुझे बोहोत सहना.

भगवान तुझे खूब लंबी उमर दे

जिसमे तुझे ना कोई फिकर दे

ताकि तू हूमें ऐसे ही ढेर सारा प्यार दे.

मा कहती थी, सच कहती थी

परियों की दुनिया से आई हूँ

पर भगवान का शुक्रिया इसलिए अदा करती हूँ

की अपनी किस्मत में आपको मा क रूप में लिखवा क लाई हूँ.