एक नयी अदा मिली है
खुद से कुछ चाहत सी होने लगी है
अपने ख्वाबो में
तुम्हे देखने की आदत सी होने लगी है
खुदा ही जाने
क्यू देख के तुम्हे, सजदे में सर मेरा झुक जाता है
धरती का हर कतरा रुक जाता है
जो तुम ना कहते हो
वो तुम्हारी खामोशी कह जाती है
ज़ुबान पे आती नही बात जो
आँखें तुम्हारी बयान कर जाती हैं
कुछ देर, कुछ समय बिता क देखो
काई अनसुने गीत सुनाई देंगे
कुछ देर, पास बैठ क देखो
दिल में छिपी कई ख्वाहिशें दिखाई देंगी
कुछ देर, दुनिया छोड़कर देखो
एक नयी दुनिया दिखाई देगी
बस कुछ देर, सब दर्द भूलकर देखो
खुशियों की काई वजह दिखाई देंगी
बारिश क पानी में
पलकों से मेरी कई कहानियाँ बह जाती हैं
यूँ तो हर हालत में संभालना आता है
पर कहीं ना कहीं,
खुद को ग़लत साबित करने की गुज़ारिश भी इसमे छिपी रह जाती है
अंधेरी इस दुनिया में
रोशिनी का तुम दिया बन जाओ
मतलबी से संसार में
तुम मेरा जहाँ बन जाओ
बस थोड़े से प्यार की ज़रूरत है
थोड़े से सहारे की
खुद को तोड़ा सा खुश रख साकु जिसमे
ज़रूरत है ऐसे नज़ारे की
बस, जितनी बार भी गिरु
हाथ तुम्हारा मौजूद हो
कितनी भी मुश्किल आए
कंधा तुम्हारा हमेशा महसूस हो
छूकर देखोगे, बिखर जौंगी
ढूँढने निकलेगा जो कोई
सिर्फ़ आँखों में तुम्हारी पाई जौंगी
लफ्ज़ ऐसे कहने हैं
की सूरत न्ही, मेरी शायरी से तुम्हे प्यार हो जाए
जब भी मेरी कलाम से स्याही निकले
उन लफ़ज़ो से तुम्हे ऐतबार हो जाए
अब इन काग़ज़ क पन्नो से
इबादत सी हो गयी है
इनकी ख़ूसबु से अब मुझे
मोहब्बत सी हो गयी है
कहते कहते इतना कह जाना है
की अल्फाज़ो को और कष्ट ना देना पड़े
की आँखें बंद करके बाहों में तुम्हारी, एक सुकून की साँस ले लू
की भरोसा करने क लए तुमपर, निगाहें खोलने की ज़रूरत तक ना पड़े.
खुद से कुछ चाहत सी होने लगी है
अपने ख्वाबो में
तुम्हे देखने की आदत सी होने लगी है
खुदा ही जाने
क्यू देख के तुम्हे, सजदे में सर मेरा झुक जाता है
धरती का हर कतरा रुक जाता है
जो तुम ना कहते हो
वो तुम्हारी खामोशी कह जाती है
ज़ुबान पे आती नही बात जो
आँखें तुम्हारी बयान कर जाती हैं
कुछ देर, कुछ समय बिता क देखो
काई अनसुने गीत सुनाई देंगे
कुछ देर, पास बैठ क देखो
दिल में छिपी कई ख्वाहिशें दिखाई देंगी
कुछ देर, दुनिया छोड़कर देखो
एक नयी दुनिया दिखाई देगी
बस कुछ देर, सब दर्द भूलकर देखो
खुशियों की काई वजह दिखाई देंगी
बारिश क पानी में
पलकों से मेरी कई कहानियाँ बह जाती हैं
यूँ तो हर हालत में संभालना आता है
पर कहीं ना कहीं,
खुद को ग़लत साबित करने की गुज़ारिश भी इसमे छिपी रह जाती है
अंधेरी इस दुनिया में
रोशिनी का तुम दिया बन जाओ
मतलबी से संसार में
तुम मेरा जहाँ बन जाओ
बस थोड़े से प्यार की ज़रूरत है
थोड़े से सहारे की
खुद को तोड़ा सा खुश रख साकु जिसमे
ज़रूरत है ऐसे नज़ारे की
बस, जितनी बार भी गिरु
हाथ तुम्हारा मौजूद हो
कितनी भी मुश्किल आए
कंधा तुम्हारा हमेशा महसूस हो
छूकर देखोगे, बिखर जौंगी
ढूँढने निकलेगा जो कोई
सिर्फ़ आँखों में तुम्हारी पाई जौंगी
लफ्ज़ ऐसे कहने हैं
की सूरत न्ही, मेरी शायरी से तुम्हे प्यार हो जाए
जब भी मेरी कलाम से स्याही निकले
उन लफ़ज़ो से तुम्हे ऐतबार हो जाए
अब इन काग़ज़ क पन्नो से
इबादत सी हो गयी है
इनकी ख़ूसबु से अब मुझे
मोहब्बत सी हो गयी है
कहते कहते इतना कह जाना है
की अल्फाज़ो को और कष्ट ना देना पड़े
की आँखें बंद करके बाहों में तुम्हारी, एक सुकून की साँस ले लू
की भरोसा करने क लए तुमपर, निगाहें खोलने की ज़रूरत तक ना पड़े.